गलवान घाटी में झड़प के बाद सीमा पर मार्शल आर्ट ट्रेनर्स तैनात कर रहा है चीन

नई दिल्ली(एजेंसी): गलवान घाटी में हुए नुकसान के बाद खबर है कि चीनी सेना भारत से सटी सीमा पर मार्शल आर्ट ट्रेनर्स को तैनात कर रही है. माना जा रहा है कि ये ट्रेनर चीनी सैनिकों को मार्शल आर्ट सिखाएंगे. ये जानकारी ऐसे समय में आई है जब गलवान घाटी में हुई हिंसा में भारतीय सेना के घातक कमांडोज़ ने हाथापाई में चीन के कम से कम 15 सैनिकों की गर्दन तोड़ दी थी.

हांगकांग की मीडिया में ये खबर आई है कि चीन की पीएलए सेना भारत से सटी सीमा पर 20 मार्शल आर्ट ट्रेनर्स तैनात कर रही है. चीन के सरकारी न्यूज चैनल, सीसीटीवी ने भी खबर दी है कि तिब्बत की राजधानी ल्हासा में इन ट्रेनर्स को तैनात किया जाएगा और ये तिब्बत में तैनात मिलिशिया-फोर्स की मदद करेंगे.

हालांकि चीनी सरकारी मीडिया ने ये साफ नहीं किया कि ये ट्रेनर्स भारत से सटी सीमा पर तैनात सैनिकों को मार्शल आर्ट के गुर सिखाएंगे, लेकिन ऐसा लगता है कि ये निर्णय गलवान घाटी में 15/16 जून की रात को हुए हिंसक संघर्ष के बाद किया गया है, क्योंकि इस खूनी झड़प में भारतीय सेना के घातक कमांडोज़ ने चीन के करीब 15 सैनिकों की क्लोज-क्वार्टर फाइट में गर्दन तोड़ दी थी.

इस झड़प में भारतीय सेना के कमांडिंग ऑफिसर समेत कुल 20 सैनिक वीरगति को प्राप्त हो गए थे और 76 सैनिक घायल हो गए थे. चीन ने अभी तक अपने हताहत हुए सैनिकों के बारे में कोई आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की है.

भारतीय सेना की हर पलटन में एक खास घातक कमांडो की टुकड़ी होती है. इस टुकड़ी में युवा सैनिक होते हैं और हथियारों के साथ साथ अनआर्म्ड-कॉम्बेट यानी बिना हथियार के लड़ने में माहिर होते हैं.

भारतीय सेना के स्पेशल फोर्सेज़ के कमांडो हों या घातक टुकड़ी के, सभी को फिलीपींस की मार्शल आर्ट, ‘पिकेटी तिरसिया काली’ ‌सीखनी होती है. इसमें बिना हथियार के ही दुश्मन पर जोरदार हमला करना सिखाया जाता है. ये कमांडोज़ को इसलिए सिखाई जाती है ताकि बिना हथियारों के भी दुश्मन से लोहा लिया जा सके.

1996 की संधि के तहत भारत-चीन सीमा पर सैनिक किसी भी तरह के फायर-आर्म यानी गन या राइफल का इस्तेमाल नहीं कर सकते, इसीलिए 15 जून की रात को जो हिंसक झड़प हुई थी, तब दोनों तरफ के सैनिकों ने कोई हथियार या फायरिंग नहीं की थी. लेकिन लाठी, डंडे, रॉड और जमकर हाथा-पाई हुई थी. उसी दौरान भारतीय सेना के घातक कमांडो चीनी सेना पर भारी पड़ गए थे. हालांकि शुरूआत में चीनी सेना ने धोखे से भारतीय सेना की एक पेट्रोलिंग पार्टी को बंधक बना लिया था और कमांडिंग ऑफिसर कर्नल संतोष बाबू की धोखे से हत्या कर दी थी.

कर्नल संतोष बाबू की हत्या का बदला लेने के लिए 16 बिहार के टूआईसी यानि सेकेंड इन कमांड के नेतृत्व में 16 बिहार और 3 पंजाब यूनिट के घातक कमांडोज़ ने चीनी सेना की निगरानी-चौकी पर हमला कर आग के हवाले कर दिया था. इस हमले के दौरान उनके साथ मीडियम और फील्ड रेजीमेंट के सैनिक भी साथ थे.

इस दौरान हुई गुत्थमगुत्था में भारतीय सैनिकों ने चीनी सेना को बड़ा नुकसान पहुंचाया था. कहा जा रहा है कि चीनी सेना को इस हमले में भारत से दोगुना नुकसान हुआ था. दावा किया गया है कि चीन के 40 सैनिकों की जान इस संघर्ष में चली गई थी और  100 से ज्यादा सैनिक घायल हुए थे.

यही वजह है कि चीन अब मार्शल आर्ट ट्रेनर्स को भारतीय सीमा पर तैनात कर रहा है. हालांकि, गलवान घाटी की हिंसा के बाद भारत ने अपने सैनिकों को विशेष परिस्थितियों में हथियार चलाने और गोली चलाने के आदेश भी दे दिए हैं.

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