नई दिल्ली, 6 जून 2026 (एजेंसी) | ईरान-अमेरिका तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य संकट के बीच जब पूरा विश्व तेल की कीमतों से जूझ रहा है, तब भारत की दूरदर्शी नीति और मजबूत अर्थव्यवस्था देशवासियों के लिए कवच बनकर सामने आई है। पाकिस्तान ने शुक्रवार को पेट्रोल में सिर्फ 4 रुपये की कटौती की घोषणा की, जिसके बाद भी वहां पेट्रोल 377.78 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। वहीं केरोसिन 8.70 रुपये महंगा होकर 280.70 रुपये/लीटर पहुंच गया।
भारत में स्थिरता, पाकिस्तान में अस्थिरता
होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले वैश्विक तेल का 20% हिस्सा जाता है। पाकिस्तान अपनी 90% से ज्यादा तेल जरूरत इसी रास्ते से पूरी करता है, इसलिए वहां दामों में भारी उतार-चढ़ाव है। पिछले हफ्ते पाक सरकार ने पेट्रोल-डीजल 22 रुपये घटाकर “ईद तोहफा” बताया था, इस हफ्ते फिर 4 रुपये घटाए, लेकिन रेट अब भी 377 रुपये के पार।वहीं भारत सरकार ने रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार, विविध देशों से तेल खरीद और टैक्स में संतुलन के जरिए कीमतों को स्थिर रखा है। ग्लोबल क्राइसिस के बीच भी भारतीय उपभोक्ता को “रोज का झटका” नहीं लग रहा।
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भारत की 3 बड़ी ताकतें जो काम आईं:
- कूटनीतिक डायवर्सिफिकेशन: रूस, खाड़ी देशों, अफ्रीका से तेल खरीद। होर्मुज पर निर्भरता कम.
- रणनीतिक भंडार: विशाखापट्टनम, मंगलुरु, पादुर में 5.33 मिलियन टन का इमरजेंसी स्टॉक.
- उपभोक्ता सुरक्षा: सरकार ने टैक्स स्ट्रक्चर लचीला रखकर अंतरराष्ट्रीय झटके को घरेलू बाजार तक नहीं पहुंचने दिया.
विशेषज्ञों का मत:
ऊर्जा विश्लेषकों का कहना है कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था और विदेशी मुद्रा भंडार की कमजोरी के कारण वहां तेल के दाम सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजार से जुड़ जाते हैं। भारत ने “आत्मनिर्भर ऊर्जा नीति” से इस झटके को सोख लिया है।
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