कृष्ण जन्माष्टमी 4 को: 15 वर्षों बाद रोहिणी नक्षत्र और अष्टमी तिथि का विशेष योग

पांच महायोगों  की जन्माष्टमी 2026: जाने कैसे करें पूजन, होगा लाभ

                          ज्योतिषाचार्य डॉ.दत्तात्रेय होस्केरे

रायपुर (अविरल समाचार). जन्माष्टमी 2026 (Janmashtmi 2026) : भाद्रपद मास की अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में भगवान श्री कृष्ण का ठीक मध्य रात्रि में अवतरण हुआ था|कारागार में मध्य रात्रि के समय अत्यंत कष्ट में भी प्रसन्न चित्त माता देवकी ने उन्हे जब जन्म दिया तो वे अवगत थीं कि वे प्रकृति के नियंता को पृथ्वी पर जन्म देने जा रही हैं|पिता ने जब एक टोकरी में डाल कर यमुना में बहाया तो वे भी अवगत थे कि सर्वकारणो के कारण साक्षात विष्णु को किसी एक परिवार तक सीमित नही रखा जा सकता|ईश्वर को पृथ्वी पर लाने वाली माँ देवकी और पिता वसुदेव ने कष्टों को सह कर कठिन साधना की और ईश्वर की इस लीला का प्रमुख कारण बने|  

सन्यासियों और गृहस्थों के लिए एक ही दिन जन्माष्टमी और विशेष योग 70 वर्षों बाद

वैसे तो जन्माष्टमी (Janmashtmi) दो तरह की हो सकती है| विष्णु धर्मोत्तर पुराण , ‘निर्णयामृत’ और ‘तिथितत्व’ नामक ग्रंथ कहते है, कि जन्माष्टमी या तो रोहिणी नक्षत्र युक्त या बिना रोहिणी नक्षत्र वाली हो सकती है| अर्द्ध रात्री मे वृषभ राशि का चन्द्रमा , वृषभ लग्न और अष्टमी तिथि एसा ही योग बना रहें हैं जैसा भगवान् श्रीकृष्ण के जन्म  के समय था|सूर्य बलवान होकर अपने ही घर सिंह राशि मे है, शुक्र स्वगृही है और बृहस्पति कर्क राशि मे उच्च का है यह भी कृष्ण भगवान् के जन्म के समय का योग ही है|4 सितंबर शुक्रवार को रात्री 12.13 बजे तक  अष्टमी तिथि  है लेकिन रोहिणी नक्षत्र रात्री 11.03 बजे तक ही है |लेकिन चूँकि 4तारीख को मध्य रात्री मे अष्टमी तिथि है अत:4 तारीख की रात्री को ही जन्माष्टमी मनाई जायेगी| 4 तारीख को सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग ,सुकर्मा योग और बुधादित्य योग है अर्थात पांच योग बन गये है|

इस तरह करें पूजन

जन्माष्टमी के दिन प्रात:काल भगवान श्रीकृष्ण का नाम स्मरण करते हुए हाथ में पीले चावल लेकर पूजन और उपवास का संकल्प लें। यदि आप अपने घर में झूला स्थापित कर, पूजा करना चाहें तो दोपहर में ही माँ देवकी का स्मरण कर झूला स्थापित कर दें।

रात्रि 12 बजे बाल कृष्ण की प्रतिमा को जल, दूध, चन्दन युक्त जल से स्नान करवायें तथा भगवान को वस्त्र और श्रृंगार इत्यादि अर्पित कर के भोग लगायें। सुगन्धित पदार्थों से युक्त आरती करें। रात्रि जागरण कर ‘ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करें।

  1. संतान प्राप्ति का मार्ग होगा सुगम: यदि विवाह के कई वर्षो के पश्चात भी संतान की प्राप्ति नहीं हुई है तो जन्माष्टमी की रात्रि निराहार रहकर केसर और कस्तुरी युक्त गाय के दूध से बाल गोपाल की प्रतिमा का अभिषेक करें। संतान गोपाल मंत्र का पठन करें या इस मंत्र का जाप करें:

        मंत्र: कात्यायनी महामाये महायोगिन्यधीश्वरी।

               नन्दगोप सुतं देहि पतिं में कुरुते नम:॥

         प्रत्येक गुरुवार को इस प्रक्रिया को दोहरायें। लाभ होगा।  “ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप नित्य करें। 

  1. शीघ्र विवाह होगा: विवाह में यदि देरी हो रही है और बाधा भी है तो हरे वस्त्र पहने हुए राधा कृष्ण की एक तस्वीर अपने पूजा स्थान में लगायें। जन्माष्टमी की रात्रि से इस मंत्र का जाप प्रारम्भ करें:

                              मंत्र: कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने।प्रणत क्लेश नाशाय गोविन्दाय नमो नम:। मंत्र का जाप प्रतिदिन करें।

  1. कर्ज से मिलेगी मुक्ति :ऋण मुक्ति के लिये जन्माष्टमी की रात्रि भगवान का पूजन और श्रृंगार करें और एक तेल का दीपक पीपल के पेड के नीचे रख दें। घर वापस आ कर आठ कौडियों को पीले वस्त्र में बान्ध दें और प्रतिदिन उसे सीधे हाथ में रख कर मंत्र, ‘ह्रीं श्रीं श्रीयै नम:’ का जाप करें। गुरु वार को भगवान के दर्शन करें।
  2. रोजगार संबंधी समस्या का होगा समाधान : रोजगार सम्बन्धी समस्या के लिये जन्मष्टमी की रात्रि गोपाल सहस्रनाम का पठ करते हुए भगवान को पीले पुष्प अर्पित करें। तत्पश्चात प्रत्येक गुरुवार को भगवान के दर्शन कर पीले पुष्प करें।

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