गोधन न्याय योजना जगाइस किसान मन मा आस, कहिन- गोबर से पैसा मिलही तो गाय बर चारा भी खरीद सकबो

रायपुर (अविरल समाचार) : हरेली के अवसर पर शुरू हुई भूपेश बघेल सरकार की गोधन न्याय योजना को लेकर जिले के गौ पालकों में उत्साह नजर आ रहा है. इससे एक तरफ किसानों और गौ पालकों को गोबर का मूल्य मिल सकेगा, जिससे वे अपने चौपायों के लिए जरूरी चारा खरीद पाएंगे, वहीं दूसरी ओर खेती-किसानी के लिए रसायनिक खाद पर निर्भरता कम होगी, और वर्मी कपोस्ट का उपयोग जैविक खेती के लिए कर पाएंगे.

जिला प्रशासन ने भी शासन की इस महती योजना को मूर्त रूप देने अधिकारियों की बैठक ली और जिले के छह विकासखंडों के लिए नोडल अधिकारी की नियुक्ति करते हुए इस सफल बनाने की रणनीति बनाई है. कलेक्टर सुनील कुमार जैन के मुताबिक जिले के 61 गौठानों में 20 जुलाई से गोबर खरीदने का कार्य प्रारंभ किया जाएगा, और इसके बेहतर क्रियान्वयन के लिए नोडल अधिकारियों की नियुक्ति कर दी गई है, जो सतत् निरीक्षण और निगरानी करेंगे. साथ ही गौठान प्रबंधन समिति को भी खरीदी को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए हैं. गोबर खरीदी का कार्य गौठान प्रबंधन समिति करेगी और भुगतान सहकारी बैक के माध्यम से किया जाएगा. इसके लिए सभी आवश्यक तैयारियां कर ली गई है.

ग्राम खम्हरिया के राजराम कहते हैं कि सरकार गोबर खरीदही तो हमन ला फायदा ही होही. पैसा मिलही त गाय मन बर चारा भी ले सकबो और धर म बांध के भी रखबो. बलौदाबाजार की शशि यादव ने कहा कि सरकार गोबर खरीदही त बहुत अच्छा बात हवय पहली हमन गोबर ल फेक देवत रहेन अब नयी फेकन, अउ वोला बेचके जेन पैसा आही तेकर ले गाय मन बर चारा खरीदबो, ऐकर ले वो ह बने मजबूत बनही और ज्यादा दूध-दही तेकर ले हमन तरक्की भी करबो. गौ पालक शिवकुमार यदु ने कहते हैं कि हम लोग अभी तक गोबर को फेंक देते थे, पर अब सरकार गोबर खरीदेगी तो इससे हमें पैसा मिलेगा, जिससे हम पशुओं के लिए चारा भी खरीद सकेंगे.

कांग्रेस के जिलाध्यक्ष हितेन्द्र ठाकुर ने बताया कि मुख्यमंत्री की यह बहुत ही महती योजना है, जिसका सीधा लाभ ग्राम के किसानों एवं गौ पालकों को मिलेगा. इससे उनकी आर्थिक समृद्धि होगी और जो गौ पालक जो चारे के अभाव में अपने जानवरों को बाहर में खुला छोड़ देते थे, वे अब घर पर रखकर गोबर से प्राप्त आय से चारे का प्रबंध कर सकेंगे. यह विश्व की पहली योजना है, जिसमें प्रदेश की सरकार गोबर खरीदकर वर्मी कम्पोस्ट खाद बनाएगी, जिसके उपयोग से पर्यावरण को भी फायदा मिलेगा.

श्री गौ उपासना सेवा समिति भाटापारा की युवा सदस्य प्रगति शुक्ला कहती हैं कि निश्चित ही यह योजना बहुत अच्छी है, लेकिन इसका क्रियान्वयन पूरी ईमानदारी से होना चाहिए, तभी यह फलीभूत होगी. आज बहुत सी गायें सड़कों में बैठकर अकाल मौत के साथ ही अपाहिज हो जाती हें. इस योजना को सही रूप प्रदान करते हुए पूरी ईमानदारी से कार्य करवाया जाए और उन लोगों को यह कार्य दिया जाये, जो नि:स्वार्थ भाव से गायों की सेवा करते हैं, तभी इसका उन्हें फायदा भी मिलेगा और उनकी आर्थिक समस्या भी दूर होगी.

भाजपा नेता टीएल धुरंधर के कहना है कि छत्तीसगढ़ किसानों और गौ पालकों का राज्य है. जहां के लोग आज भी गाय के गोबर को खाद बनाकर खेतों में डालते हैं. शासन की यह योजना अच्छी तो है, लेकिन इसका क्रियान्वयन सही होना चाहिए. अधिकतर देखने में आ रहा है कि सरकारी कर्मचारियों की उदासीनता की वजह से शासन-प्रशासन की अनेक योजनाएं चाहे वह केन्द्र की हो या राज्य की मूत्र रूप नहीं ले पाती है. शासन को इस कार्य को प्रारंभ करने के पूर्व पूरा सेटअप बनाना चाहिए, और ईमानदारी से कार्य करते हुए किसानों व पशु पालकों को फायदा दिलाना चाहिए, तभी इसकी सार्थकता सिद्ध होगी. समाजसेवी प्यारेलाल सेन ने कहा कि इस योजना से जो लावारिस पशु सड़क पर घूमते थे, और अकाल मृत्यु हो जाती थी, इस पर लगाम लगेगी. लोग पशुओं को अपने घर पर रखेंगे. लेकिन इसके लिए लोगों को भी जागरूक होना पडे़गा. केवल शासन के बलबूते ही यह योजना नहीं चल पायेगी. समाजसेवियों को भी आगे आना होगा.

अधिवक्ता संजय तिवारी कहते हैं कि सरकार बहुत ही अच्छी योजना प्रारंभ होने जा रही है, अब लोगों को गाय के गोबर का भी पैसा मिलेगा, जिससे वे पशुपालक, जो गायों को छोड़ देते थे, वे अपने घर पर बांधकर रखेंगे. लेकिन योजना के क्रियान्वयन में पूरी ईमानदारी होनी चाहिए, तभी योजना सफल होगी. बलौदाबाजार के ही कंगलुराम साहू का मानना है कि भूपेश बघेल सरकार किसानों की मंशा के अनुसार बहुत ही अच्छी योजना ला रही है. इससे खाद बनेगा और हमारे खेतों की पैदावार बढे़गी. गाय के गोबर को शासन खरीदेगी तो हमे कुछ पैसा भी मिलेगा, जिससे गायों के लिए चारा-पानी की व्यवस्था हो जाया करेगा. बस, काम पूरा ईमानदारी से होना चाहिए. सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि किसान छोड़ रहे युवा अब रोजगार के बढ़े अवसर को देखते  हुए खेती-किसानी के लिए प्रेरित होंगे, स्व-रोजगार बढ़ेगा, और गांवों से शहरों की ओर होने वाले पलायन पर रोक लगेगी.

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