क्या एआईएमआईएम के चुनाव लड़ने से बीजेपी को फायदा होता है ? ओवैसी ने आंकड़ों के साथ दिया जवाब

पटना (एजेंसी). एआईएमआईएम : विधानसभा चुनाव के लिए बिहार में उपेंद्र कुशवाहा के नेतृत्व में एक नया गठबंधन बना है. इसमें असदुद्दीन ओवैसी की ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) भी शामिल है. ऐसे में इनका विरोधी पक्ष यह आरोप लगा रहा है कि ओवैसी बीजेपी विरोधी वोट को बांटने का काम कर रहे हैं. इसे लेकर ओवैसी ने आंकड़ों के साथ जवाब दिया है.

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एआईएमआईएम के असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि ये जो लोग आरोप लगा रहे हैं ये इनके गुरूर की मिशाल है. पिछले लोकसभा के चुनाव में आरजेडी के उम्मीदवार कहीं पर भी नहीं जीते, जबकि आप बिहार में कई बार सत्ता में रहे हैं. किशनगंज से अख्तरुल इमान हमारे कैंडिडेट थे और तीन लाख वोट वो हासिल किए. 3.35 लाख वोट जेडीयू-बीजेपी के कैंडिडेट ने हासिल किए. और 3.50 लाख वोट पाने में कांग्रेस के उम्मीदवार कामयाब हुए. तो फिर वोट बांटने का सवाल ही पैदा नहीं होता.

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ओवैसी ने कहा कि एक सीट हम लड़ते हैं तो ये आसमान सिर पर उठा लेते हैं. लेकिन डाटा से यह बात साबित हो रही है कि एआईएमआईएम के लड़ने से बीजेपी को फायदा नहीं होता है. उन्होंने कहा कि अगर भाजपा बिहार में जीत रही है तो उसका ज़िम्मेदार राजद और कांग्रेस है, क्यूंकि वो अवाम के दिल नहीं जीत पा रहे हैं, उनमें वो क़ाबिलियत नहीं है.

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बता दें कि प्रथम चरण के चुनाव के नामांकन भरने की आखिरी दिन गुरुवार को राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (रालोसपा), बहुजन समाज पार्टी (बसपा), अल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लमीन (एआईएमआईएम) सहित 6 राजनीतिक दलों ने मिलकर गठबंधन बनाया है. इस गठबंधन का नाम ग्रैंड डेमोक्रेटिकसेक्यूलर फ्रंट (विराट लोकतांत्रिक धर्मनिरपेक्ष मोर्चा) रखा गया है. सभी 6 पार्टियों की यहां संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसकी घोषणा करते हुए रालोसपा के प्रमुख और पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि बिहार में बने नए मोर्चा का नाम ‘ग्रैंड डेमोक्रेटिक सेक्यूलर फ्रंट’ रखा गया है, जिसमें कुल 6 पार्टियां शामिल हैं और इस मोर्चे के संयोजक देवेंद्र यादव होंगे.

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उन्होंने बताया कि इन छह दलों में रालोसपा, एआईएमआईएम, बसपा, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी, समाजवादी जनता दल डेमोक्रेटिक और जनतांत्रिक पार्टी सोशलिस्ट शामिल है. इस प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए, देवेंद्र यादव ने कहा कि बिहार अब भी विकास से बहुत दूर है. उन्होंने विकल्प देने के लिए सभी पार्टी को साथ आने के लिए प्रसन्नता व्यक्त की. इस मौके पर गठबंधन ने उपेन्द्र कुशवाहा को अपना नेता घोषित किया है और उनके नेतृत्व में ही यह फ्रंट चुनाव लड़ेगा. पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंन्द्र कुशवाहा को इस गठबंधन का मुख्यमंत्री उम्मीदवार भी घोषित किया गया.

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