सामना को दिए इंटरव्‍यू में बोले उद्धव ठाकरे, ‘मैं ट्रंप नहीं हूं, अपने लोगों को तड़पते नहीं देख सकता’

मुंबई: सामना के कार्यकारी संपादक व राज्यसभा सांसद संजय राउत ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे का इंटरव्यू लिया है जिसे आज के दैनिक सामना में प्रकाशित किया गया है. उद्धव ने बतौर मुख्यमंत्री, कार्यकाल और मौजूदा चुनौतियों पर बातचीत की. संजय राउत ने इसे अनलॉक्ड इंटरव्यू नाम दिया है.

महाराष्ट्र में कोरोना के बढ़ते मामले और लॉकडाउन पर उद्धव ठाकरे ने कहा, ”मैं ट्रंप नहीं हूं. मैं मेरी आंखों के सामने मेरे लोगों को ऐसे तड़पते हुए नहीं देख सकता हूं. बिल्कुल नहीं. इसलिए एक बात तय करो. लॉकडाउन गया खड्ढे में. जान गई तो भी बढ़िया लेकिन हमें लॉकडाउन नहीं चाहिए. तय करते हो क्या बोलो!”

मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा, ”मुझे खुशी है कि जनता मुझ पर मतलब महाराष्ट्र सरकार पर विश्वास रखती है. सरकार की बात सुनती है. सहयोग करती है. इसलिए मेरे चेहरे पर तनाव नहीं है, जनता जब साथ हो तो किसी प्रकार का तनाव या चिंता करने की आवश्यकता नहीं है. जनता हमारे साथ है. जनता का विश्वास है. वह विश्वास मेरे लिए शक्ति देनेवाला है. जब तक वह विश्वास मेरे साथ है, जब तक वह शक्ति मेरे पास है तब तक मुझे किसी प्रकार के तनाव की परवाह करने की आवश्यकता नहीं.”

उद्धव ठाकरे ने कहा कि 6 महीना पूरा होने पर सरकार का जन्मदिन धूमधाम से मनाया गया. अब मुझे ऐसा लगता है कि विरोधी दल नेता पद दिवस को भी धूमधाम से मनाया जा रहा है. विपक्षी नेता देवेंद्र फडणवीस खूब घूम रहे हैं, मैं इस पर कुछ नहीं कहूंगा. हाल ही में फडणवीस दिल्ली में थे, वहां कोरोना की परिस्थिति देखते होंगे. देवेंद्र फडनविस का पेट दर्द इसलिए भी होगा कि, कहीं भी न जाते हुए, न घूमते हुए एक संस्था ने देश के सर्वोत्तम मुख्यमंत्रियों में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री का चयन किया. इसका भी पेट दर्द हो सकता है. क्योंकि कोरोना के लक्षण अलग-अलग हैं. देवेंद्र फडणवीस पर चुटकी लेते हुए कहा कि उनका जो विधायक का फंड है, वो महाराष्ट्र का फंड दिल्ली में देने के कारण वो सभी बातें दिल्ली में जाकर कर रहे हैं. मेरे काम से विपक्ष के पेट मे दर्द, उनकी उंगलियां काली नीली हो रही हैं.

मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना से लड़ाई एक रण ही है. यह रण संग्राम है. ये बड़ा वैश्विक रण है. जैसा मैंने कहा था, यह वर्ल्ड वॉर है. वॉर अगेंस्ट वायरस. जैसे दो विश्वयुद्ध हुए. वैसे ही यह तीसरा विश्वयुद्ध. महाराष्ट्र में सेना बुलाने की नौबत नहीं आई. ऐसी खबरें आई थीं, लेकिन जरूरत नहीं पड़ी.

उद्धव ठाकरे ने कहा कि देश में दस लाख के ऊपर मरीजों की संख्या है. महाराष्ट्र का आंकड़ा तीन लाख से ऊपर चला गया है. सीएम ने कहा, ”तीन लाख कुल, मतलब पहला मरीज जो ठीक होकर घर गया है, उसे भी इसमें जोड़ा जा रहा है. आंकड़े कम ही हैं, अर्थात एकदम ही कम हुआ है ऐसा भी मैं नहीं कहूंगा क्योंकि कुछ जगहों पर संक्रमण बढ़ रहा है. आंकड़ा बढ़ रहा है. वह थोड़ा बढ़ेगा, लेकिन जल्द-से-जल्द मरीज को पहचानकर उसे ठीक करना यह महत्वपूर्ण है.

उद्धव ठाकरे ने कहा कि मुंबई नियंत्रण में आ रही है. मैं उस बारे में अभी कुछ नहीं बोलूंगा. मुझे जल्दीबाजी में कोई स्टेटमेंट देना नहीं है.लेकिन मुंबई के करीब के जो शहर हैं. कल्याण, डोंबिवली, अंबरनाथ या पुणे, पिंपरी-चिंचवड ये परिसर कोरोना से ज्यादा संक्रमित हुए हैं और सभी को वो चिंता का विषय लगता है.

लॉकलाउन करना चाहिए क्या? लॉकडाउन से क्या मिला,
सीएम ने कहा, ”मेरा उनसे यही कहना है कि हम आपके लिए लॉकडाउन खोल देते हैं. फिर यहां लोग मरेंगे तो आप जिम्मेदारी लेंगे क्या? आज जो दरवाजा खोलो कहकर सरकार के दर पर आकर बैठे हैं, आक्रोश व्यक्त कर रहे हैं उनके लिए दरवाजे खोलने में कोई हर्ज नहीं, लेकिन दरवाजा खुलने के बाद आप जिम्मेदारी लेंगे क्या? अर्थव्यवस्था के संकट की चिंता हमें भी है.”

मुख्यमंत्री बाहर कम निकलते हैं इस पर सफाई देते हुए कहा है कि मंत्रालय में मैं कम गया, इस आरोप में दम नहीं है. अब तकनीक इतनी प्रगति कर चुकी है. इस तकनीक का आप उपयोग नहीं कर सकते तो आप दुर्भाग्यशाली हो फिलहाल तकनीक के माध्यम से हम कितने सारे काम कर रहे हैं. लेकिन जब तुम घूमते हो तब तुम्हारी कुछ सीमाएं होती हैं. तुम एक ही जगह पर जाते हो लेकिन जब तुम वीडियो conferencing का उपयोग करते हो तो तुम हर जगह जाते हो.

अयोध्या में जो राम मंदिर बन रहा है, कोरोना की चिंता उससे ज्यादा है. मंदिर के जरिए कोरोना ठीक नहीं होगा, ऐसा शरद पवार बोले हैं. उत्तर सही है, डॉक्टर चाहिए ही. हम जो सुविधा तैयार कर रहे हैं वह सुविधा बीमारों की ठीक नहीं करेगी. इन सुविधाओं के साथ डॉक्टर्स चाहिए. मैंने पहले ही कहा था कि जंबो फैसिलिटी चाहिए. मतलब हमने कोई बेड की दुकान नहीं खोली है. फर्नीचर की दुकान नहीं खोली है. प्रदर्शनी नहीं लगाई है. इस बेड पर जब मरीज आएंगे तब मरीज के बेड के बगल में डॉक्टर्स एवं सिस्टर्स चाहिए और हाथ में दवाइयां चाहिए. (राम मंदिर पर सीधा जवाब टाल दिया)

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने जानबूझकर धारावी का उल्लेख किया. धारावी पैटर्न की सराहना की. मुझे लगता है कि ये आपकी सरकार का सबसे बड़ा यश है. राज्य सरकार और महानगरपालिका के प्रयासों की सफलता है. बल्कि आपने लगातार धारावी और मुंबई की ओर ध्यान दिया.

कोरोना वैक्सीन को लेकर सीएम ने कहा कि ऐसी खबरें हैं कि वह अगस्त में आएगी. अगस्त में आई तो खुशी की बात है लेकिन साधारणत: वर्ष के आखिर तक हमारे देश में वैक्सीन तैयार हो सकती है. ऐसे संकेत हैं.

केंद्र और राज्य को एक होकर काम करना होगा. प्रधानमंत्री मोदी बीच-बीच में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक करते हैं और कोरोना के बारे में जो कुछ भी बातें हम उनके सामने रखते हैं उस बारे में उनकी मदद मिलती है.

सीएम ने कहा कि इसके अलावा फिलहाल विकल्प नहीं है. इसके लिए हम हर तरफ से राय-मश्विरा ले रहे हैं. लॉकडाउन के बारे में जैसे मतभेद हैं, ठीक ऐसा ही शिक्षा के बारे में भी हो रहा है. अब निर्णय लेना पड़ेगा. अंतिम वर्ष की पदवी परीक्षा का निर्णय लिया गया है. परीक्षा नहीं होगी.

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