फिंगर 4 से पीछे हटने के लिए तैयार नहीं हैं चीनी सैनिक, पैंगोंग-त्सो लेक के करीब तैनात की तोपें

नई दिल्ली(एजेंसी): एलएसी पर टकराव के बीच खबर है कि चीन की पीएलए सेना ने पैंगोंग-त्सो लेक के करीब अपनी तोपें तैनात कर ली हैं. खुफिया सूत्रों के मुताबिक, चीनी सेना ने इन तोपों की पैंगोंग लेक के करीब जबरदस्त किलेबंदी की है ताकि अगर हालात बिगड़ जाएं तो उनपर किसी गोलाबारी का असर ना हो. जानकारी के मुताबिक, इसके करीब ही चीन ने एक फील्ड-हॉस्पिटल भी खड़ा किया है.

सूत्रों की मानें तो पैंगोंग-त्सो लेक से सटे इलाके में तोपों को तैनात करने से ऐसा लगता है कि चीन के इरादे सही नहीं है. क्योंकि चीनी सैनिक पैंगोंग लेक से सटे फिंगर नंबर 4 इलाके से पीछे हटने के लिए तैयार नहीं है. ऐसे में चीनी सेना अपनी तैनाती इस इलाके में मजबूत करने में जुटी है. लेकिन ऐसा भी हो सकता है कि दूसरे चरण की डिसइंगेजमेंट बातचीत असफल होने के चलते और चीनी सैनिकों द्वारा फिंगर 4 की रिज-लाइन से पीछे ना हटने के चलते चीनी सेना को ऐसा अंदेशा हो कि भारतीय सेना हमला कर सकती है, जैसा कि गलवान घाटी में हुआ था. इसलिए चीनी सेना ने अपनी तोपखाने को यहां तैनात किया है.

पैंगोंग लेक में फील्ड हॉस्पिटल खड़ा करने के पीछे भी यही कारण हो सकता है कि गलवान घाटी की हिंसक झड़प में चीनी सेना को बड़ा नुकसान हुआ था. एक अनुमान के मुताबिक, चीन के कम से कम 40 सैनिक मारे गए थे और 100 से भी ज्यादा सैनिक घायल हुए थे. घायल सैनिकों को अस्पताल ले जाने के लिए चीनी सेना को हेलीकॉप्टर तक लगाने पड़ गए थे. ऐसे में माना जा रहा है कि चीनी सेना ने घायल सैनिकों के इलाज के लिए यहां फील्ड हॉस्पिटल खड़ा किया है.

मिली जानकारी के मुताबिक, चीनी सेना की ये आर्टलरी पोजिशन (यानि तोपों की लोकेशन) फिंगर 8 के पीछे सिरिजैप के बेहद करीब है. लेकिन इन तोपों की जद में पूरा फिंगर एरिया है. क्योंकि फिंगर 1 से 8 तक की दूरी करीब 12-13 किलोमीटर की है. साथ ही फील्ड हॉस्पिटल की लोकेशन भी सिरिजैप और खुरनाक फोर्ट के बीच कही हैं.

पीएलए सेना की आर्टी-लोकेशन फिंगर 8 के पीछे है इसका पता पिछले हफ्ते ओपन-सोर्स सैटेलाइट इमेज से भी चलता है. इन सैटेलाइट इमेज में चीन की कम से कम 14 तोपों की लोकेशन साफ दिखाई पड़ रही हैं. ठीक उसी तरह फील्ड हॉस्पिटल भी दिखाई पड़ रहा है. लेकिन भारतीय सेना के पूर्व उपथलसेनाध्यक्ष, लेफ्टिनेंट जनरल सुब्रत साह के मुताबिक, सैटेलाइट इमेज में जो फील्ड-हॉस्पिटल के टेंट पर जो प्लस-साइन लगा है उससे जरूरी नहीं है कि ये फील्ड-हॉस्पिटल हो. ये हो सकता है कुछ और हो और इसे छिपाने के लिए उसपर डॉक्टरी-चिन्ह लगा दिया गया हो.

आपको बता दें कि पिछले ढाई महीने से पूर्वी लद्दाख से सटी एलएसी यानि लाइन ऑफ एक्चुयल कंट्रोल पर भारत और चीन के बीच टकराव की स्थिति बनी हुई है. तनाव कम करने के लिए दोनों देशों के सैन्य कमांडर चार बार बैठक भी कर चुके हैं. पहले चरण का डिसइंगेजमेंट सफल रहा जिसके तहत गलवान घाटी, गोगरा और हॉट-स्प्रिंग में तो दोनों देशों की सेनाएं थोड़ा पीछे हट चुकी हैं लेकिन पैंगोंग लेक से सटे फिंगर एरिया में पेंच फंस गया है. वहां से चीनी सैनिक फिंगर एरिया नंबर 4 की रिज-लाइन से पीछे हटने को तैयार नहीं है. ऐसे में डिसइंगेजमेंट प्रक्रिया में बाधा पड़ गई है.

शुक्रवार को दोनों देशों के वर्किंग मैकेनिज्म फॉर कंसलटेशन एंड कोर्डिनेशन (डब्लूएमसीसी) ऑन इंडो चायना बॉर्डर एफेयर्स की बैठक भी हुई जिसमें एलएसी पर पूरी तरह से डिसइंगेजमेंट और डि-एस्कलेशन पर बात हुई.

जनरल झाओ जोंगजी के बदले जाने की खबर

इस बीच खबर है कि चीन की पीएलए सेना की वेस्टर्न थियेटर कमांड के कमांडर, जनरल झाओ जोंगजी के बदले जाने की खबर है. झाओ जोंगजी की जगह पीएलए सेना के चीफ ऑफ स्टाफ, ल्यु ज़ेनली को डब्लूटीसी का कमांडर बनाए जाने की खबर है. हालांकि, जनरल झाओ जोंगजी के बारे में खबर है कि उनकी उम्र 65 साल हो चुकी है. लेकिन सूत्रों की मानें तो पूर्वी लद्दाख में भारत के खिलाफ टकराव के लिए झाओ जोंगजी को ही जिम्मेदार माना जा रहा है. इसीलिए उन्हें उनके पद से हटाए जाने की खबर है.

माना जा रहा है कि झाओ जोंगजी ने चीन की सेंट्रल मिलिट्री कमीशन में जगह पाने के लिए भारत के खिलाफ पूर्वी लद्दाख में तनातनी शुरू की. जबकि लेफ्टिनेंट जनरल ल्यू ज़ेनली को युद्धन्मोदी नहीं माना जाता है. वे पीएलए सेना के सबसे युवा कमांडर हैं और वियतनाम युद्ध में हिस्सा ले चुके हैं.

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