करना चाहते हैं पीपीएफ में निवेश ? जान लें ये 5 जरूरी बातें, फायदे में रहेंगे

नई दिल्ली(एजेंसी): स्मॉल सेविंग्स स्कीमों की ब्याज दरें लगातार घटती जा रही है. हालांकि इन सभी छोटी बचत योजनाओं में पीपीएफ की ब्याज दरें सबसे आकर्षक है. अगर आप पीपीएफ में निवेश करने जा रहे हैं तो ये पांच चीजें जरूर जान लें.

पीपीएफ में इंटरेस्ट रेट एश्योर्ड है लेकिन यह फिक्स नहीं है. इसकी ब्याज दरें दस साल के बॉन्ड यील्ड से लिंक्ड है. यह दर हर तिमाही में तय की जाती है. इसका आधार पिछले तीन महीनों के दौरान के बॉन्ड यील्ड पर निर्भर करता है.

पीपीएफ अकाउंट 15 साल में मैच्योर हो जाता है. इसके बाद आप पूरा बैलेंस निकाल कर इसे बंद कर सकते हैं या फिर बगैर इसे पांच साल के लिए बढ़ा सकते हैं. आप इसमें कंट्रीब्यूट करें या न करें लेकिन इस पर आपको इंटरेस्ट मिलता रहता है.

पीपीएफ पर इंटरेस्ट का कैलकुलेशन हर महीने होता है. हर महीने 5 तारीख से लेकर उसके आखिरी दिन तक जितना बैलेंस होता है, उसी पर ब्याज की गणना होती है. इसलिए यह निश्चित कर लेना चाहिए कि पीपीएफ अकाउंट में आपका कंट्रीब्यूशन 5 तारीख से पहले क्रेडिट हो जाए.

इनकम टैक्स के सेक्शन 80 सी के तहत अधिकतम डेढ़ लाख रुपये तक का डिडक्शन मिलता है. पीपीएफ पर मिलने वाले ब्याज पर टैक्स नहीं लगता है. पीपीएफ से पैसा निकालने पर भी टैक्स नहीं लगता है. मैच्योरिटी पर भी पैसा निकालने पर टैक्स नहीं लगता.

अगर आप अपनी पत्नी या बच्चे के नाम पर पीपीएफ अकाउंट खुलवाते हैं तो अतिरिक्त टैक्स बेनिफिट का लाभ उठा पाते हैं. टैक्स नियमों के मुताबिक पत्नी को दिया गया गिफ्ट का निवेश हो जाता है. इससे मिली आय देने वाले की आय में जुड़ जाता है. चूंकि पीपीएफ टैक्स फ्री है इसलिए यह आपकी टैक्स देनदारी को नहीं बढ़ाता. इसलिए आप डेढ़ लाख रुपये तक इसमें निवेश कर सकते हैं . इस पर कोई टैक्स नहीं लगता.

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