अजीम प्रेमजी का 75वां जन्मदिन, आईटी बिजनेस के शहंशाह से परोपकारी बादशाह तक, जानें उनका सफर

नई दिल्ली(एजेंसी): दिग्गज आईटी कंपनी विप्रो लिमिटेड के पूर्व चेयरमैन अजीम प्रेमजी का आज 75वां जन्मदिन है. वो न सिर्फ आईटी इंडस्ट्री के बिजनेस टायकून के तौर पर जाने जाते हैं बल्कि परोपकार के मामले में भी वो विश्वप्रसिद्ध हैं. अपनी दानवीरता के लिए लोकप्रिय अजीम प्रेमजी का जन्म 24 जुलाई 1945 को हुआ था और आज उनके 75वें जन्मदिन पर सोशल मीडिया पर भी उन्हें जमकर बधाई दी जा रही हैं.

अजीम प्रेमजी का जन्म 24 जुलाई 1945 को मुंबई में हुआ था और उनका पूरा नाम अजीम हाशिम प्रेमजी है. अजीम प्रेमजी के पास अमेरिका के कैलोफोर्निया की स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बैचलर ऑफ साइंस की डिग्री है जो इंजीनियरिंग की ग्रेजुएट डिग्री के बराबर मानी जाती है. अगस्त 1966 में अपने पिता की मृत्यु के बाद वो वापस भारत लौट आए उस समय उनकी उम्र 21 साल थी.

भारत आने के बाद उन्होंने साबुन और वेजिटेबिल कारोबार करने वाली अपने पिता की कंपनी वेस्टर्न इंडियन वेजिटेबल प्रोडक्ट लिमिटेड को संभाला जो सनफ्लॉवर वनस्पति ब्रांड नाम से खाने का तेल और कपड़े धोने का साबुन बनाती थी. अजीम प्रेमजी ने भारत लौटने के बाद कंपनी के कारोबार में बेकरी, हेयर केयर प्रोडक्ट्स और बच्चों से जुड़े प्रोडक्ट्स का उत्पादन भी शुरू किया.

1980 के समय में आईटी सेक्टर में दिख रही संभावनाओं को देखते हुए अजीम प्रेमजी ने वेस्टर्न इंडियन वेजिटेबल प्रोडक्ट लिमिटेड को विप्रो में बदल दिया. इसके बाद कंपनी साबुन की जगह पर्सनल कंप्यूटर बनाने के साथ सॉफ्टवेयर सर्विसेज भी प्रोवाइड कराने लगी. इसके बाद ही कंपनी का नाम बदलकर विप्रो (WIPRO) किया गया था. इसी विप्रो को आजकल आईटी और एफएमसीजी क्षेत्र की दिग्गज कंपनियों में शुमार किया जाता है.

साल 2005 में अजीम प्रेमजी को भारत सरकार ने पद्म भूषण सम्मान से नवाजा और साल 2011 में उन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था.

साल 2010 में उन्हें एशियावीक ने दुनिया के 20 सबसे शक्तिशाली पुरुषों में से एक के तौर पर चुना था. टाइम मैगजीन के दुनिया के 100 सबसे प्रभावशाली लोगों में उन्हें साल 2004 में और एक बार साल 2011 में शामिल किया गया था.

अजीम प्रेमजी ने कोरोना वायरस के संकटकाल में भी 1125 करोड़ रुपये का दान दिया था. इसके तहत विप्रो लिमिटेड कंपनी ने 100 करोड़ रुपये जबकि विप्रो एंटरप्राइजेज लिमिटेड 25 करोड़ रुपये और अजीम प्रेमजी फाउंडेशन ने 1000 करोड़ रुपये देने का एलान किया था. यह रकम विप्रो की वार्षिक सीएसआर गतिविधियों और अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के सामान्य जनकल्याणकारी खर्चों के अलावा है.

2001 में अजीम प्रेमजी ने अजीम प्रेमजी फाउंडेशन की स्थापना की जो एक गैर-लाभकारी संगठन है. दिसंबर 2010 में उन्होंने भारत में स्कूली शिक्षा के लिए 2 अरब डॉलर दान करने का प्रण लिया जो कि अपनी तरह का सबसे बड़ा दान था. इसके अलावा मार्च 2019 में प्रेमजी ने अपने पास रखे हुए विप्रो के 34 फीसदी शेयर अजीम प्रेमजी फाउंडेशन में दे दिए जिनकी कीमत करोड़ों डॉलर में है.

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